बुधवार 20 मई 2026 - 15:19
शहीद रईसी अपने पद को शक्ति का साधन नहीं, बल्कि जिहाद का मैदान मानते थे

हौज़ा / हुज्जतुल-इस्लाम बसीरती ने कहा: शहीद रईसी अपने पद को शक्ति का साधन नहीं बल्कि जिहाद (संघर्ष) का मैदान मानते थे। शहीद जुमहूर (शहीद राष्ट्रपति) का प्रशासनिक मामलों की देखरेख का दृष्टिकोण जिहादी और जन-उन्मुख था और यही दृष्टिकोण इसका कारण बना कि वे अपने पवित्र जीवन के अंतिम क्षणों तक सेवा और जनता की समस्याओं के पीछे लगे रहने के मार्ग में मैदान में मौजूद रहे।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , काशान के इस्लामी प्रचार के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम मेंहदी बसीरती ने शहीद रईसी और सेवा के अन्य शहीदों की दूसरी बरसी के अवसर पर हौज़ा न्यूज़ के प्रतिनिधि से बातचीत के दौरान उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, शहीद रहबर ने शहीद रईसी की प्रशंसा में जो कुछ बार-बार कहा, वह केवल उनके व्यक्तिगत नैतिक गुणों का समूह नहीं था बल्कि एक क्रांतिकारी और जन-उन्मुख शासन के नमूने को पेश करना था। एक ऐसा नमूना जिसमें जिम्मेदार व्यक्ति स्वयं को शक्ति का मालिक नहीं समझता, बल्कि जनता का सेवक और मैदान का सिपाही होता है।

काशान के इस्लामी प्रचार निदेशालय के प्रमुख ने शहीद रहबर .के वक्तव्यों में शहीद रईसी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उनके 'जन-उन्मुख' होने को बताया और कहा, क्रांतिकारी साहित्य में शहीद जुमहूर का जन-उन्मुख होना, समाज के भीतर वास्तविक उपस्थिति, जनता की समस्याओं को महसूस करना, वंचित क्षेत्रों की कठिनाइयों को समझना और कठिनाइयों से भागना नहीं आदि शामिल है।

उन्होंने कहा,शहीद रईसी केवल राष्ट्रपति की कुर्सी से शासन नहीं करते थे, बल्कि स्वयं निकट से जनता के बीच उपस्थित होते थे। यह वही तर्क है जिसे शहीद रहबर 'मैदानी प्रशासनिक मामलों की अंजामदेही' कहते थे। एक प्रशासक जो स्वयं लोगों के बीच मौजूद होता है, वास्तविकता को महसूस करता है और निर्णय मैदानी हक़ीक़तों के आधार पर लेता है, न कि औपचारिक रिपोर्टों के माहौल से।

हुज्जतुल इस्लाम बसीरती ने शहीद रईसी की एक और महत्वपूर्ण विशेषता को उनकी अथक मेहनत बताते हुए कहा,शहीद रईसी ने अपने शासनकाल में दिखा दिया कि एक क्रांतिकारी प्रशासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए रात-दिन नहीं देखता।

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